भगवान शिव को ही क्यों प्रिय है श्मशान, पढ़े महादेव के जीवन दर्शन

मृत्यु का पल या मृत्यु की संभावना अधिकतर लोगों के जीवन का सबसे तीव्र अनुभव होता है। उनमें से अधिकांश लोग तीव्रता के उस स्तर को अपने जीवन-काल में कभी महसूस नहीं कर पाते। उनके प्रेम में, उनकी हंसी में, उनकी खुशी में, उनके आनंद में, उनके दुख में.. किसी भी स्थिति में वैसी तीव्रता नहीं होती।

इसी वजह से शिव श्मशान या कायांत में जाकर बैठते और इंतजार करते हैं। ‘काया’ का अर्थ है ‘शरीर’ और ‘अंत’ का मतलब है ‘खत्म होना’। कायांत का अर्थ है : जहां शरीर खत्म हो जाता है, न कि जहां जीवन खत्म होता है। अगर आप अपने जीवन में केवल अपने शरीर को ही जानते हैं, तो जिस पल आप शरीर छोड़ते हैं, वह पल आपके जीवन का सबसे तीव्र पल बन जाता है। अगर आप अपने शरीर के परे कुछ जानते हैं, तो शरीर का छोड़ना बहुत महत्वपूर्ण नहीं रह जाता। जिस किसी ने भी यह पहचान लिया है कि वह कौन है, और क्या है, उसके लिए कायांत उतना बड़ा पल नहीं होता। वह सिर्फ जीवन का एक और पल है, बस। लेकिन जिन्होंने सिर्फ एक स्थूल शरीर के रूप में जीवन जिया है- जब उन्हें शरीर के रूप में सब कुछ छोड़ना पड़ता हैं, तब वह पल बहुत ही तीव्र होता है।

अगर आप सिर्फ एक काया न बनकर, जीव बन जाएं, अगर आप सिर्फ एक जीवित शरीर नहीं, बल्कि एक जीवित प्राणी बन जाएं- तो अमरता आपके लिए एक स्वाभाविक स्थिति होगी।

Source Link —> https://hindi.webdunia.com/shravan/shiv-and-shmashan-117070700029_1.html

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