क्या आप जानते हे, देवशयनी एकादशी के वक्त ही क्यो भगवान सोजाते हे चार महीनो के लिए ? जाने उसका महत्व…

वामन पुराण के मुताबिक असुरों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था. राजा बलि के आधिपत्‍य को देखकर इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्‍णु के पास मदद मांगने पहुंचे. देवताओं की पुकार सुनकर भगवान विष्‍णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए. वामन भगवान ने बलि से तीन पग भूमि मांगी. पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया. अब तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं थी तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें.

भगवान वापन ने ऐसा ही किया. इस तरह देवताओं की चिंता खत्‍म हो गई. वहीं भगवान राजा बलि के दान-धर्म से बहुत प्रसन्‍न हुए. उन्‍होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा तो बलि ने उनसे पाताल में बसने का वर मांग लिया. बलि की इच्‍छा पूर्ति के लिए भगवान को पाताल जाना पड़ा. भगवान विष्‍णु के पाताल जाने के बाद सभी देवतागण और माता लक्ष्‍मी चिंतित हो गए. अपने पति भगवान विष्‍णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्‍मी गरीब स्‍त्री बनकर राजा बलि के पास पहुंची और उन्‍हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी. बदले में भगवान विष्‍णु को पाताल लोक से वापस ले जाने का वचन ले लिया.

पाताल से विदा लेते वक्‍त भगवान विष्‍णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि वह आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्‍ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में वास करेंगे. पाताल लोक में उनके रहने की इस अवधि को योगनिद्रा माना जाता है.

देवशयनी एकादशी का महत्‍व

देवशयनी एकादशी को आषाढ़ी एकादशी पद्मा एकादशी और हरि शयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी से लेकर अगले चार महीनों तक श्री हरि विष्‍णु पाताल लोक में निवास करते हैं, जिसे भगवान की योग निद्रा कहा जाता है. यही वजह है कि भगवान की गैर-मौजूदगी में किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों नहीं करने चाहिए.

देवशयनी एकादशी की पूजा विधि

– इस दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें.
– इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने का भी विशेष महत्‍व है. अगर ऐसा न कर पाएं तो गंगाजल से घर में छिड़काव करना चाहिए.
– फिर घर के मंदिर में भगवान विष्‍णु की मूर्ति स्‍थापित कर उसका पूजन करें.
– पूजा के बाद व्रत कथा सुनें.
– आरती कर प्रसाद बांटें.

कब शुरू होते हैं मांगलिक कार्य?

मान्‍यता है कि कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी के बाद भगवान नींद से जागते हैं यानी कि पाताल से वापस बैकुंठ धाम पधारते हैं और फिर सभी शुभ कार्यों का आरंभ होता है.

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