इस राक्षस ने ब्रम्हा जी का वेद छीनकर क्षीर सागर मे छुपा दिया था

लगभग हर भारतीय ने गीता पढ़ी है या सुनी तो होगी है जिसमे एक श्लोक मे ब्रह्मा जी के आयु के सन्दर्भ उनके एक दी का काल मान लिखा है. 1000 चतुर्युगी का दिन होता है उनका और उतनी की ही रात, एक चतुर्युगी में 4230000 साल की एक चतुर्युगी और 2000 होने से ब्रह्मा जी के एक दिन का मान होता है धरती के 8.5 अरब साल का.

एक वैज्ञानिक तथ्य ये है की सूर्य को ब्रह्माण्ड के 354 चक्कर (भारतीय कैलेंडर के एक साल के दिन) लगता है, ब्रह्मा जी की आयु 50 वर्ष हो चुकी है और वो कौनसे नंबर के ब्रह्मा है ये भी तय शुदा नहीं है तो ऐसे इतिहास (अनंत) को क्या लिखा जा सकता है आप भी बताये?

तारीखों में हम इतिहास लिखते नहीं और न ही सम्भव है, दुनिया विश्वास नहीं करती क्योंकि उनके पास 2000 साल पुराना ही इतिहास है हम तो करे और शाश्त्र में लिखी एक एक बात सत्य है जिसे कालांतर में विदेशी भी मान रहे है यु ही नहीं नासा संस्कृत में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग कर रहा और उसे सन्देश भेजने में काम ले रहा है.

ऐसे में भगवान् के जो अनंत अवतार हुए है उन्हें आप हम सिर्फ नाम से ही संक्षिप्त में जानते है, जाने ऐसे ही मतस्य अवतार की कथा जो की एक अंश भी नहीं हरी कथा का…

भगवान् मतस्य आधे मनुष्य और आधे मछली के जैसे दीखते है जो की चतुर्भुज है, उनके चारो हाथो में शंख चक्र खड्ग और वेद है. इसी कल्प में जब ब्रह्मा जी सोये हुए थे तब एक राक्षस शंखासुर ने उनके वेद जिसमे इतिहास लिखा गया है हमारा चुरा लिया और क्षीर सागर के गर्भ में जाकर छुप गया.

तब भगवान् विष्णु की ब्रह्मा जी द्वारा प्रार्थना करने पर वो मतस्य रूप में प्रकट हुए और समुद्र के गर्भ में जाकर उस राक्षस का संघार किया और वेदो को पुनः ब्रह्मा जी को लाकर सौंप दिया. कंही कंही शंस्खज़ूर को हयग्रीव भी बताया गया है जिसका विष्णु जी ने हयग्रीव रूप धारण कर के संघार किया था.

माँ शक्ति से उसने वरदान माँगा था की केवल हयग्रीव ही मुझे मारे, ऐसे उसका नाम इतिहास में अमर हो गया था.

Source link —> https://www.therednews.com/5464-shankhasur-demon-killing

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