क्या आप जानते हे इस राजा को जिसके राज्य मे कभी नहीं होता था सूर्यास्त ?

जब असुर था तो क्यों पूजते आज भी राजा बलि को लोग? ये सवाल आपके मन में भी आया होगा और आप उन लोगो को भी नास्तिक मानते होंगे लेकिन ऐसा है नहीं. असुर का मतलब ये नहीं की उसके सींग पूंछ हो वो भी हमारी आपकी तरह एक साधारण मनुष्य ही होता है कोई जानवर जैसा नहीं.

गर्भादान के समय पर निर्भर करता है मनुष्य पशु प्रवर्ति होगा या मनुष्य ही रहेगा, रावण का गर्भादान दोपहर में हुआ था जो की पिशाचो का समय है इसलिए वो माँ के गर्भ से ही दस सर और बीस भुजाओ वाला हुआ. बलि राजा और भक्त प्रह्लाद का ही पौत्र था जिसका गर्भादान उत्तम समय (रात्रि में अच्छे नक्षत्रो में) हुआ था.

ऋषि वाल्मीकि जी के भाई दक्ष प्रजापति (दोनों ही प्रचेताओ के पुत्र थे) की 60 बेटिया थी, उनमे से 13 का विवाह उन्होंने कश्यप ऋषि से किया था. अदिति के पुत्र आदित्य देवता हुए जबकि दिति के पुत्र दैत्य हुए जिनके की गर्भादान का समय उत्तम नहीं था इसलिए वो पापाचारी हुए.

जाने बलि के बारे में वो बातें जो बनाती है उसे पूजनीय….

राजा बलि के राज्य में सूर्य कभी अस्त ही नहीं होता था वो स्वयं ही सभी ग्रहो का काम करते थे, उनके राज्य में बिना बोये ही खेतो में फैसले उगती और पकती थी किसान सिर्फ काटते थे. न तो अकाल मृत्यु ही थी न ही कोई महामारियाँ, इसी के लिए आज भी उनके निवास (जो शायद दक्षिण भारत में था) के लोग उनके स्वागत में पलक पावड़े बिछाते है.

लेकिन उन्होंने कुछ गलतिया भी की थी जिसके चलते उनका राज्य गया अन्यथा अभी तक रहता राज्य, एक बार खाना कहते समय उन्होंने जूठे हाथो से गाय का घी छू दिया था और दूसरा वो त्रिदेवो को नहीं बल्कि अपने को पुजवाते थे जिसके चलते ही अदिति ने वरदान प्राप्त कर उनका राज्य छीन लिया था.

अगर वो त्रिदेवो की ही पूजा करवाते और घी को जूठे हाथो से नहीं छूटे तो शायद आज भी वो ही राजा रहते, लेकिन एक सच और भी जान लीजिये. भगवान् विष्णु के वरदान के अनुसार अगले इंद्र राजा बलि ही होंगे और तब दिन रात सूर्य तप्त ही रहेगा फिर फलसे खेतो में बिना बोये उगेगी.

हिंदी कैलेंडर के श्रावण महीने की पंचमी यानि की नाग पंचमी के दिन से दक्षिण भारत में ओणम उत्स्व का आयोजन शुरू होता है जो की रक्षा बंधन के अगले दिन प्रतिपदा को समाप्त हो जाता है. मान्यता है की पंचमी के दिन राजा बलि धरती पर अपनी प्रजा से मिलने आते है और रक्षा बंधन के अगले दिन चले जाते है.

या शायद नहीं जाकर पृथ्वी पर ही रहते है क्योंकि कार्तिक अमावस्या के अगले दिन भी बलि पूजा होती है जिसके बाद चातुर्मास ख़त्म हो जाते है और देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन बलि फिर पाताल में तो विष्णु जी वैकुण्ठ में प्रस्थान करते है.

Source link —> https://www.therednews.com/5038-know-full-facts-of-king-bali

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