जानिए दानवीर कर्ण को स्वर्ग मे इस वजह से भूखा मरना पड़ा था ?

सुन कर चौंक गए होंगे लेकिन आज जाने ऐसा आध्यात्मिक सत्य जो कइयों के कान खड़े कर देगा, कलियुग में दान की महिमा कही गई है लेकिन दान किसका करे और किसे करे ये बात भी समझ लेनी चाहिए क्योंकि कुपात्र को दिया गया दान दाता को ही पाप का भागी बना देता है.

अन्न का दान सबसे बड़ा दान है जिसके लिए सभी पात्र है, “भूखे को भोजन देना प्यासे को पानी देना यही मनुष्य का कर्तव्य है!” ये स्लोगन आपने पढ़ा ही होगा. अगर कोई भूखा और प्यासा है तो वो चाहे कितना ही पड़ा पापी क्यों न हो उसे भी उतना ही अधिकार है भोजन पानी पाने का जितना की किसी ब्राह्मण को!

लेकिन जिस कारण को दानवीर का खिताब दे रखा है सेकुलरो ने उस कर्ण को ही फिर क्यों स्वर्ग में जाकर भूखा मरना पड़ता था? आप को बात शायद झूठ लगे लेकिन ये ही शास्वत सत्य है, स्वर्ग में कर्ण को भूखे ही रहना पड़ा था, ऐसे में वो गया था देवराज इंद्र के पास और उनसे पूछा कारण?

मांगने पर जिसने अपने शरीर से चिपके स्वर्ण के कवच और कुण्डल भी निकाल कर दे दिए थे जिसने, आखिर स्वर्ग में क्यों हुई उसकी दुर्दशा….

हालाँकि कर्ण के पाप ज्यादा थे लेकिन फिर भी एक क्षत्रिय की भांति युद्ध क्षेत्र में वीरगति प्राप्त पाने के एवज में उसे पहले स्वर्ग मिला था क्योंकि ये नियम है परमात्मा का के जिसके पाप ज्यादा है उसे पहले स्वर्ग का मजा चखाया जाता है उसके बाद नरक का.

इससे होता ये है की पाप करने वाले को पुण्य का फल भी समझ में आ जाता है और पाप के फल भोगे हुए को पाप से दूर रहने की प्रेरणा ही भी मिलती है.

लेकिन स्वर्ग में दुर्योधन आदि को तो खाने को लज्जिज पकवान मिले लेकिन कर्ण को सोने की थाली में सोने की अशर्फिया ही दी जाती थी खाने को. सोने से भूख नहीं मिलती लेकिन इंद्र के आदेश अनुसार ही ऐसा भोजन मिल रहा था कर्ण को तो उसने इंद्र से जाकर पूछा इसका कारण.

तब इंद्र ने कहा की तुम दानवीर थे लेकिन तुमने अपने जीवन में प्रसिद्धि (नाम पाने की चाह में) के लिए सिर्फफ सोने का ही दान दिया था. धरती पर मनुष्य जो भी दान देता है यंहा ऊपर स्वर्ग में उसे वही खाने के लिए प्राप्त होता है, तुमने तो मोह वश अपने पुरुखों का श्राद्ध तर्पण भी नहीं किया था तो ऐसे में तुम्हे ये ही मिलेगा खाने को.

अधर्मी को धर्म का ज्ञान नहीं था इसलिए उसने सोने का ही दान दिया लेकिन फिर भी दानवीर होने के बदले उसे मौका मिला धरती पर पुनः आके अपने पूर्वजो का श्राध्द करने का. उसके बाद वो फिर स्वर्ग में लौट आया और तब कर्ण को भी खाना मिलने लगा स्वर्ग में….

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